'वक्फ कानून के प्रावधानों पर कोर्ट का अंतरिम आदेश सामान्य प्रक्रिया', पूर्व कानून मंत्री का बयान

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 को लेकर दायर की गई याचिकाओं पर सुनवाई की। कोर्ट ने केंद्र की मांग पर सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए सात दिन का समय दिया। पूर्व कानून मंत्री ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश से साफ है कि कोर्ट सात दिन बाद सांविधानिक कानून के महत्वपूर्ण सवालों के कारण मामले पर सुनवाई करेगा। 

Apr 18, 2025 - 10:20
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'वक्फ कानून के प्रावधानों पर कोर्ट का अंतरिम आदेश सामान्य प्रक्रिया', पूर्व कानून मंत्री का बयान

नई दिल्ली (आरएनआई) वक्फ कानून को लेकर सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश को लेकर पूर्व कानून मंत्री अश्विनी कुमार ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वक्फ कानून के प्रावधानों पर कोर्ट का अंतरिम आदेश सामान्य प्रक्रिया है। महत्वपूर्ण मामलों कोर्ट अक्सर ऐसा करते हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि याचिकाकर्ता हार गए या केंद्र सरकार जीत गई। 

पूर्व कानून मंत्री ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश से साफ है कि कोर्ट सात दिन बाद सांविधानिक कानून के महत्वपूर्ण सवालों के कारण मामले पर सुनवाई करेगा। अंतरिम आदेश भी कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल के आश्वासन के बाद दिया है। इससे साफ है कि कोर्ट महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई में सामान्य प्रक्रिया अपना रहा है। इसका मतलब बिल्कुल यह नहीं है कि याचिकाकर्ता जीत गए या हार गए और न ही ये है कि सरकार हार गई या जीत गई। 

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 को लेकर दायर की गई याचिकाओं पर सुनवाई की। चीफ जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ से केंद्र की मांग पर सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए सात दिन का समय दिया। सरकार ने यह भी आश्वासन दिया कि अगली सुनवाई तक 'उपयोगकर्ता की ओर से वक्फ' या 'दस्तावेजों की ओर से वक्फ' संपत्तियों को गैर-अधिसूचित नहीं किया जाएगा। इसके बाद कोर्ट ने मामले की अगली तारीख पांच मई तय की।

सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि सरकार लोगों के प्रति जवाबदेह है। सरकार को लाखों-लाखों प्रतिनिधि मिले, गांव-गांव वक्फ में शामिल किए गए। इतनी सारी जमीनों पर वक्फ का दावा किया जाता है। इसे कानून का हिस्सा माना जाता है। अंतरिम रोक की राय पर मेहता ने कहा कि कानून पर रोक लगाना एक कठोर कदम होगा। उन्होंने अदालत के सामने कुछ दस्तावेजों के साथ प्रारंभिक जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा। सॉलिसिटर जनरल ने आश्वासन दिया कि इस दौरान बोर्ड या काउंसिल की कोई नियुक्ति नहीं होगी। उन्होंने यह भी कहा कि यह ऐसा मामला नहीं है, जिस पर इस तरह से विचार किया जा सके।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि परिषद और बोर्ड में कोई नियुक्ति नहीं की जाएगी। कोर्ट ने कहा कि सॉलिसिटर जनरल ने आश्वासन दिया कि अगली सुनवाई की तारीख तक, वक्फ, जिसमें पहले से पंजीकृत या अधिसूचना के माध्यम से घोषित वक्फ-बाय-यूजर शामिल है, को न तो डीनोटिफाई किया जाएगा और न ही कलेक्टर इसे लेकर कोई फैसला लेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र सात दिनों के भीतर जवाब दाखिल करे। तब तक यथास्थिति बनी रहेगी।

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