मलयालम अभिनेता सिद्दीकी को बड़ी राहत, दुष्कर्म मामले में सुप्रीम कोर्ट से मिला अंतरिम संरक्षण

जस्टिस हेमा कमेटी की रिपोर्ट के बाद मलयालम सिनेमा पर छाए संकट के बादल छंटने का नाम नहीं ले रहे हैं। एक के बाद एक अभिनेता पर कानूनी तलवार लटकती जा रही है। 

Sep 30, 2024 - 15:00
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मलयालम अभिनेता सिद्दीकी को बड़ी राहत, दुष्कर्म मामले में सुप्रीम कोर्ट से मिला अंतरिम संरक्षण

नई दिल्ली (आरएनआई) जस्टिस हेमा कमेटी की रिपोर्ट के बाद मलयालम सिनेमा पर छाए संकट के बादल छंटने का नाम नहीं ले रहे हैं। एक के बाद एक अभिनेता पर कानूनी तलवार लटकती जा रही है। इस बीच अभिनेता सिद्दीकी को राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दुष्कर्म के एक मामले में सिद्दीकी को गिरफ्तारी से अंतरिम राहत दी है।

सुप्रीम कोर्ट ने मलयालम एक्टर सिद्दीकी को युवा एक्ट्रेस द्वारा लगाए गए आरोपों के आधार पर उनके खिलाफ दर्ज दुष्कर्म के मामले में गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण प्रदान किया है।

दुष्कर्म के मामले में अग्रिम जमानत देने से केरल उच्च न्यायालय के इनकार को चुनौती दी है। न्यायमूर्ति बेला एम. त्रिवेदी और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने सिद्दीकी की याचिका पर सुनवाई की और उन्हें अंतरिम जमानत दे दी। सुप्रीम कोर्ट ने अभिनेता सिद्दीकी को गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण प्रदान किया। 

इससे पहले, सुनवाई शुरू होते ही शीर्ष अदालत ने पीड़िता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर से अभिनेता के खिलाफ शिकायत दर्ज करने में विलंब के कारणों के बारे में पूछा। वकील ने पीठ से कहा कि न्यायमूर्ति हेमा समिति की रिपोर्ट, जिसने मलयालम फिल्म जगत में महिलाओं द्वारा सामना किए जाने वाले उत्पीड़न और यौन शोषण को उजागर किया है, को व्यापक संदर्भ में समझा जाना चाहिए।

केरल उच्च न्यायालय ने दुष्कर्म के एक मामले में 24 सितंबर को सिद्दीकी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा था कि उन पर लगे आरोपों की गंभीरता को देखते हुए अपराध की उचित जांच के लिए उन्हें (अभिनेता को) हिरासत में लेकर पूछताछ करना अपरिहार्य है। अदालत ने कहा था कि चूंकि सिद्दीकी ने अपने बचाव में घटना से पूरी तरह इनकार किया था, इसलिए उनका परीक्षण अभी नहीं हुआ है और इस बात की उचित आशंका है कि वह गवाहों को डरा सकते हैं और सबूतों से छेड़छाड़ कर सकते हैं, इसलिए उन्हें राहत देने के लिए "अदालत की विवेकाधीन शक्तियों का प्रयोग करना उचित नहीं होगा’।

उच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया था कि आदेश में उसके द्वारा की गई टिप्पणियों को मामले के गुण-दोष की अभिव्यक्ति के रूप में नहीं माना जाएगा। सिद्दीकी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 376 (दुष्कर्म) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत अपराध दर्ज किए गए थे। उच्च न्यायालय के समक्ष अपनी अग्रिम जमानत याचिका में उन्होंने दावा किया था कि शिकायतकर्ता एक थिएटर में 2016 में यौन दुर्व्यवहार और मौखिक यौन प्रस्ताव के निराधार और झूठे दावे पिछले पांच वर्षों से लगातार करती रही हैं।

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