दिल्ली में 27 साल बाद भाजपा सरकार
डॉ. समरेन्द्र पाठक वरिष्ठ पत्रकार।

नई दिल्ली (आरएनआई) दिल्ली में 27 साल के लंबे इन्तजार के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सत्ता में बम्पर वापसी हुयी है।13 साल से दिल्ली की सत्ता पर काबिज आम आदमी पार्टी (आप) भाजपा की आँधी में हवा हो गयी।15 वर्षो तक दिल्ली की सत्ता में रही कॉंग्रेस इस बार भी अपने बिखरे जनाधार को समेट नहीं पायी।
चुनाव परिणाम के अनुसार 70 सदस्यीय दिल्ली विधानसभा में भाजपा के खाते में 48 ,आप 22,एवं कॉंग्रेस को 0 सीटें मिलने जा रही है। कुल 699 प्रत्याशियों ने इस बार चुनाव में अपनी किस्मत आज़माया था। 60.54 प्रतिशत वोट पड़े थे।
आप के दिग्गजों अरविंद केजरीवाल एवं पूर्व उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया चुनाव हार गए हैं। मुख्यमंत्री आतिशि कालका जी से चुनाव जीतने में कामयाब रही हैं। सबसे बुरा हाल बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जदयू का बुराड़ी एवं लोजपा.रा.का देवली में हुआ,जहां वे भाजपा के गठबंधन के बावज़ूद बुरी तरह हार गए।
चुनाव परिणाम आने के साथ ही भाजपा में मुख्यमन्त्री की कुर्सी को लेकर विचार विमर्श शुरु हो गया है, लेकिन अंतिम फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह एवं पार्टी अध्यक्ष जे पी नड्डा को लेना है।
आपके संयोजक अरविंद केजरीवाल ने अपनी हार स्वीकार करते हुए भाजपा को जीत की बधाई दी है। भाजपा ने जीत के लिए जनता का आभार प्रकट किया है। वहीं कॉंग्रेस ने जनता का आभार जानते हुए दिल्ली की कुर्सी से केजरीवाल की विदाई का स्वागत किया है।
दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए 10 जनवरी को अधिसूचना जारी की गयी थी। 17 जनवरी तक नामांकन दाखिल किए गए थे।18 जनवरी को नामांकन पत्रों की जांच की गई थी एवं 20 जनवरी को नामांकन वापस लेने का अंतिम दिन था।
निर्वाचन आयोग के अनुसार दिल्ली में इस बार कुल एक करोड़ 55 लाख 24 हजार 858 मतदाताओं में 83 लाख 49 हजार 645 पुरुष और 71 लाख 73 हजार 952 महिलाएं थीं। थर्ड जेंडर मतदाताओं की संख्या 1261थीं।
स्वतंत्र एवं निष्पक्ष मतदान के लिए उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में कुल 13 हजार 33 पोलिंग बूथ बनाए गए थे, जहां सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए थे।एल.एस.
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