गाजा पट्टी पर बने सेंट हिलारियन मठ को विश्व विरासत स्थल का मिला दर्जा
दिल्ली में चल रहे विश्व धरोहर समिति के 46वें सत्र में एलान किया गया कि फलस्तीन का सेंट हिलारियन मठ/टेल उम्म आमेर गाजा पट्टी पर हो रहे हमलों के चलते विलुप्त हो रहा है। जबकि यह विश्व विरासत है। युद्ध को देखते हुए इस मठ को खतरे में विश्व विरासत सूची में शामिल किया गया है।
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नई दिल्ली (आरएनआई) गाजा पट्टी में चल रहे संघर्ष के बीच यूनेस्को ने फलस्तीन स्थित सेंट हिलारियन मठ को विश्व विरासत स्थल का दर्जा दिया है। इसे टेल उम्म आमेर के नाम से भी जाना जाता है। इस्राइल-हमास युद्ध के चलते मठ की हालत बेहद खराब हो गई है। इसके चलते यूनेस्को ने इसे खतरे की सूची में भी शामिल किया है।
दिल्ली में चल रहे विश्व धरोहर समिति के 46वें सत्र में एलान किया गया कि फलस्तीन का सेंट हिलारियन मठ/टेल उम्म आमेर गाजा पट्टी पर हो रहे हमलों के चलते विलुप्त हो रहा है। जबकि यह विश्व विरासत है। युद्ध को देखते हुए इस मठ को खतरे में विश्व विरासत सूची में शामिल किया गया है। यूनेस्को की इस पहल का लेबनान, तुर्किये, कजाकिस्तान ने यूनेस्को की पहल का स्वागत किया है।
फलस्तीन में गाजा पट्टी पर बना सेंट हिलारियन मठ एक ईसाई मठ है। इसकी स्थापना 340 ईस्वी में गाजा के मूल निवासी फादर हिलारियन ने की थी। हिलारियन ने अलेक्जेंड्रिया में पहले ईसाई धर्म अपनाया और बाद में सेंट एंथोनी से प्रेरित होकर पहले मिस्र और फिर गाजा में सन्यासी बन गए। इसके बाद उन्होंने अपने गांव थबाथा के पास एक आश्रम की स्थापना की।
सेंट हिलारियन मठ के अवशेष चार शताब्दी से भी अधिक पुराने हैं। इसमें पांच चर्च, स्नान गृह और विशाल सेंचुरी है। साथ ही एक विशाल तहखाना भी है। मठ में मिट्टी की ईंटों से छोटे-छोटे आश्रम बने थे। यह अवशेष जल्द ही खत्म हो गए। सातवीं सदी गाजा में आए भूकंप के बाद यह मठ लुप्त हो गया। बाद में 1999 में पुरातत्वविदों ने इसकी खोज की।
गाजा पर्यटन मंत्रालय के मुताबिक सेंट हिलारियन मठ को संरक्षण की जरूरत है। 2012 में इसे विश्व निगरानी स्मारक की सूची में शामिल किया गया। वहीं मौजूदा समय में चल रहे युद्ध से भी मठ को काफी नुकसान पहुंचा है। दिसंबर 2023 में यूनेस्को ने मठ को अनंतिम उन्नत संरक्षण सूची में शामिल किया था।
अमेरिका से मिले नामांकन के बाद ऐतिहासिक मोरावियन चर्च बस्तियों को भी यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में शामिल कर लिया गया। नई दिल्ली में चल रहे विश्व धरोहर समिति के 46 वें सत्र में इसकी घोषणा होने के बाद अमेरिका, जर्मनी और ब्रिटेन से आए जनप्रतिनिधियों से खुशी जताई। बताया जाता है कि डेनमार्क की मोरावियन चर्च बस्ती जो क्रिश्चियफील्ड से जुड़ी है, वह पहले से ही विश्व विरासत सूची में शामिल है। अब मोरावियन चर्च बस्ती की 18वीं शताब्दी में स्थापित बस्ती हेरनहट जमर्नी, बेथलहम यूएस और ग्रेसहिल ब्रिटेन को भी विश्व विरासत सूची में शामिल किया गया है। मोरावियन चर्च बस्ती का वास्तु शिल्प बेजोड़ है। यह स्थानीय हालातों के साथ ही अंतरराष्ट्रीय मोरावियन समुदाय की खासियत को बयां करती है। यहां की परंपराएं मोरावियन संस्कृति को जीवंत रखती हैं।
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