एआई क्षेत्र में भी बढ़ रही भारत की ताकत, UN की रिपोर्ट में दावा- निवेश के मामले में देश का 10वां स्थान

संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास (यूएनसीटीएडी) की प्रौद्योगिकी और नवाचार रिपोर्ट के मुताबिक एआई में निजी तौर पर निवेश करने के मामले में भारत का 10वां स्थान है। वहीं भारत और चीन एकमात्र ऐसे विकासशील देश हैं, जिन्होंने एआई में निवेश किया है।

Apr 4, 2025 - 14:10
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एआई क्षेत्र में भी बढ़ रही भारत की ताकत, UN की रिपोर्ट में दावा- निवेश के मामले में देश का 10वां स्थान

संयुक्त राष्ट्र (आरएनआई) आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) में भारत की ताकत लगातार बढ़ रही है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 2023 में एआई में निजी तौर पर निवेश करने के मामले में भारत का 10वां स्थान है। वहीं भारत और चीन एकमात्र ऐसे विकासशील देश हैं, जिन्होंने एआई में निवेश किया है।

संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास (यूएनसीटीएडी) की प्रौद्योगिकी और नवाचार रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत 2024 में फ्रंटियर टेक्नोलॉजीज के लिए तत्परता सूचकांक में शामिल 170 देशों में भारत 36वें स्थान पर है। 2022 में भारत इस सूचकांक में 48वें स्थान पर था। रिपोर्ट में कहा गया कि भारत, भूटान, मोरक्को, मोल्दोवा और तिमोर लेस्ते ने स्कूली शिक्षा और कार्यशील आबादी में उच्च-कौशल रोजगार के बढ़ते प्रभाव के चलते मानव पूंजी में अपनी स्थिति में सुधार किया है। 

एआई क्षेत्र में चीन, जर्मनी, भारत, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका वैज्ञानिक ताकत दिखाते हैं। AI में निजी निवेश के मामले में 2023 में 67 अरब अमेरिकी डॉलर या निजी निवेश का 70 प्रतिशत के साथ अमेरिका दुनिया में सबसे आगे है। जबकि विकासशील देश चीन 7.8 अरब अमेरिकी डॉलर के साथ दूसरे और 1.4 अरब अमेरिकी डॉलर के साथ भारत 10वें स्थान पर है। 

रिपोर्ट में कहा गया है कि 2033 तक एआई का बाजार मूल्य में 4.8 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। एआई दुनिया भर में 40 प्रतिशत नौकरियों को प्रभावित कर सकता है। इससे उत्पादकता में तो वृद्धि होगी, लेकिन ऑटामेशन और नौकरी के बारे में चिंताएं भी बढ़ेंगी।

रिपोर्ट के अनुसार एआई यह नए उद्योग भी बना सकता है और श्रमिकों को सशक्त बना सकता है। एआई से रोजगार के अवसरों को खत्म करने के बजाय उन्हें बढ़ाने, रीस्किलिंग, अपस्किलिंग और कार्यबल अनुकूलन में निवेश करने की जरूरत है।  रिपोर्ट के मुताबिक ब्राजील, चीन, भारत और फिलीपींस विकासशील देश हैं जो तकनीकी तत्परता में बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। इसलिए उम्मीद की जा सकती है कि उच्च प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद वाले देश अग्रणी तकनीक के लिए बेहतर तरीके से तैयार हैं। 

संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास (यूएनसीटीएडी) के फ्रंटियर टेक्नोलॉजीज रेडीनेस इंडेक्स में विकसित देश आगे हैं। वहीं विकासशील देशो में यहां सिंगापुर, चीन और भारत का प्रमुख स्थान है। क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर सेवाओं के मामले में शीर्ष 10 अर्थव्यवस्थाओं में चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका के पास दुनिया के बाकी हिस्सों की तुलना में अधिक सेवाएं हैं। जबकि सूची में सिंगापुर के साथ भारत और ब्राजील विकासशील देश हैं। ब्राजील, चीन और भारत जैसे विकासशील देशों के उदाहरण बताते हैं कि कैसे औद्योगीकरण से गरीबी को कम किया सकता सकता है और आर्थिक विकास को गति दे सकता है। 

रिपोर्ट में कहा गया कि संयुक्त राज्य अमेरिका में सबसे अधिक GitHub डेवलपर हैं, उसके बाद भारत और चीन हैं। भारत में लगभग 13 मिलियन डेवलपर्स हैं और ब्राजील में चार मिलियन हैं। 

एआई क्षेत्र में भारत की बढ़त के पीछे सरकारी नीति की अहम भूमिका है। भारत सरकार ने निजी क्षेत्र और शिक्षा जगत के साथ मिलकर उत्कृष्टता केंद्र बनाने का काम किया है। एआई में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान हैदराबाद और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर, कोटक भारतीय विज्ञान संस्थान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस-मशीन लर्निंग सेंटर और नेशनल एसोसिएशन ऑफ सॉफ्टवेयर एंड सर्विस कंपनीज सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन डेटा साइंस एंड एआई काम कर रहे हैं। इसके अलावा केंद्र सरकार ने भारत एआई मिशन को मंजूरी दी है। जिसका उद्देश्य एआई कार्यक्रमों में प्रवेश के लिए बाधाओं को कम करना और छोटे और मध्यम आकार के शहरों पर ध्यान केंद्रित करते हुए तृतीयक शिक्षा में एआई पाठ्यक्रमों की संख्या बढ़ाना है। 

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