ड्रोन के जरिए कॉर्निया के परिवहन की शुरुआत
डॉ.समरेन्द्र पाठक वरिष्ठ पत्रकार

नई दिल्ली (आरएनआई) ड्रोन के जरिए हरियाणा के सोनीपत स्थित डॉ श्रॉफ चैरिटी आई हॉस्पिटल से कॉर्निया के ऊतकों को राष्ट्रीय कैंसर संस्थान (एनसीआई), एम्स झज्जर और उसके बाद एम्स नई दिल्ली तक सफलतापूर्वक पहुंचाये जाने के सफल परीक्षण से अब सड़क मार्ग से यह काम संपन्न कराने से मुक्ति मिल सकती है।हालांकि कोरोना संकट के समय से ही स्वास्थ क्षेत्र में ड्रोन की मदद ली जा रही है
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार इस आशय का अध्ययन आईसीएमआर ने एम्स नई दिल्ली और डॉ श्रॉफ चैरिटी आई हॉस्पिटल के साथ मिलकर और नागरिक उड्डयन मंत्रालय के समर्थन से किया है, जिसमें दोनों शहरों के बीच की दूरी ड्रोन के जरिए लगभग 40 मिनट में तय की गई, जिसे सड़क मार्ग से तय करने में आमतौर पर 2-2.5 घंटे लगते हैं।
कॉर्नियल ऊतकों का समय पर परिवहन महत्वपूर्ण है, क्योंकि दान किए गए कॉर्निया की व्यवहार्यता समय के प्रति संवेदनशील है। परिवहन में देरी ऊतक की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है और सफल प्रत्यारोपण की संभावना को कम कर सकती है। ड्रोन-आधारित परिवहन पारंपरिक सड़क नेटवर्क के लिए एक तेज, अनुकूल तापमान प्रणाली और कुशल विकल्प प्रदान करता है।
पिछले कुछ वर्षों में, आईसीएमआर की आई-ड्रोन पहल ने पूर्वोत्तर भारत (कोविड-19 और यूआईपी टीके, दवाएं और सर्जिकल), हिमाचल प्रदेश (ऊंचे इलाकों और शून्य से नीचे के तापमान में दवाएं और नमूने), कर्नाटक (इंट्राऑपरेटिव ऑन्कोसर्जिकल नमूने), तेलंगाना (टीबी थूक के नमूने) और एनसीआर (रक्त बैग और उसके घटक) जैसे राज्यों में आवश्यक चिकित्सा आपूर्ति के लिए ड्रोन के सफल उपयोग को प्रदर्शित किया है।
स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (डीएचआर) के सचिव और आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने कहा कि आई-ड्रोन प्लेटफॉर्म की कल्पना मूल रूप से कोविड-19 महामारी के दौरान दूरदराज के क्षेत्रों में टीके पहुंचाने के लिए की गई थी। तब से इसका उपयोग अधिक-ऊंचाई और सब-जीरो वाले स्थानों पर रक्त उत्पादों और आवश्यक दवाओं की डिलीवरी के लिए की जा रही है। यह अगली कड़ी है।
एम्स नई दिल्ली के निदेशक प्रो. (डॉ.) एम. श्रीनिवास ने कहा कि भारत में कॉर्निया संबंधी अंधापन लाखों लोगों को प्रभावित करता है, और दाता ऊतक की समय पर उपलब्धता अक्सर अत्यधिक सीमित होती है। यह ड्रोन-आधारित परिवहन मॉडल दृष्टि-पुनर्स्थापना सर्जरी के लिए समान पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में एक परिवर्तनकारी कदम हो सकता है।एल.एस.
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